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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन
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श्लोक 151
श्लोक
2.5.151
এই নিত্যানন্দের ষড্-ভুজ-দরশন
ইহা যে শুনযে, তার বন্ধ-বিমোচন
एइ नित्यानन्देर षड्-भुज-दरशन
इहा ये शुनये, तार बन्ध-विमोचन
अनुवाद
जो व्यक्ति नित्यानन्द द्वारा भगवान के छह भुजाओं वाले रूप के दर्शन की इस कथा को सुनता है, वह भव-बन्धन से मुक्त हो जाता है।
One who listens to this story of Nityananda's vision of the six-armed form of the Lord becomes free from the bondage of material existence.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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