श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  2.5.144 
এ সব লোকের কি কুশল কোন ক্ষণে
হৈযাছে, হৈবেক? বুঝ ভাবি’ মনে
ए सब लोकेर कि कुशल कोन क्षणे
हैयाछे, हैबेक? बुझ भावि’ मने
 
 
अनुवाद
ध्यान से विचार करें, क्या ऐसे व्यक्तियों को कभी लाभ मिला है, या कभी मिलेगा?
 
Think carefully, have such people ever benefited, or will they ever?
तात्पर्य
हरि, गुरु और वैष्णव में भेद करने वाले और किसी की निंदा करके किसी की उपासना करने वालों को कभी कोई शुभ नहीं मिलता। यह बात समझने में सहज है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)