श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.5.14 
বস্ত্র, মুদ্গ, যজ্ঞ-সূত্র, ঘৃত, গুযা, পান
বিধি-যোগ্য যত সজ্জ সব বিদ্যমান
वस्त्र, मुद्ग, यज्ञ-सूत्र, घृत, गुया, पान
विधि-योग्य यत सज्ज सब विद्यमान
 
 
अनुवाद
“कपड़ा, मूंग दाल, ब्राह्मण धागे, घी, पान, पान और जो भी अन्य आवश्यक है, वह सब वहाँ है।
 
“Cloth, mung dal, Brahmin threads, ghee, betel leaves, betel leaves and whatever else is needed, all that is there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)