श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.5.136 
ভক্তি-যোগ বিনা ইহা বুঝন না যায
জানে জন-কত গৌরচন্দ্রের কৃপায
भक्ति-योग विना इहा बुझन ना याय
जाने जन-कत गौरचन्द्रेर कृपाय
 
 
अनुवाद
भक्ति के बिना कोई भी इसे नहीं समझ सकता। गौरचन्द्र की कृपा से यह बात कुछ ही लोगों को ज्ञात है।
 
No one can understand this without devotion. By the grace of Gaurchandra, only a few people know this.
तात्पर्य
उनकी पदार्थवादी प्रवृत्ति होने के कारण, या मानसिक सट्टेबाज होने के कारण, भक्ति सेवा की वास्तविक विशेषताओं को समझ नहीं सकते हैं। केवल वही जो श्रीमान महाप्रभु द्वारा अनुग्रहित हैं, भक्ति सेवा के माध्यम से गौर के लीलाओं को समझ सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)