श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.5.135 
যে কর্ম করযে প্রভু, সেই হয ’বেদ’
তাহি গায সর্ব-বেদে ছাডি’ সর্ব-ভেদ
ये कर्म करये प्रभु, सेइ हय ’वेद’
ताहि गाय सर्व-वेदे छाडि’ सर्व-भेद
 
 
अनुवाद
परमेश्वर द्वारा किए गए कार्यों को वेद कहा जाता है। चारों वेद सभी विरोधाभासों से बचते हुए उन कार्यों का गान करते हैं।
 
The works done by God are called the Vedas. The four Vedas sing of those works, avoiding all contradictions.
तात्पर्य
वेद में जो गौरवपूर्ण कार्य हैं, वे परम प्रभु द्वारा किए गए हैं। वेद का उद्देश्य परम प्रभु के कार्यों को उजागर करना है। प्रभु के कार्य, ही वेद का वास्तविक विषय-वस्तु हैं। वेद, किसी भी तरह का, विरोधाभासी कथन, जो निर्विवाद-ज्ञान वाले ईश्वर या परमेश्वर की महिमा करता हो, उसको स्थापित नहीं करते हैं। निर्विवाद-ज्ञान वाले हरि के विषय, वेद में बिना किसी विरोध के गाए गए हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)