श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.5.13 
পণ্ডিত বলেন,—“প্রভু কিছু নহে ভার
তোমার প্রসাদে সর্ব ঘরেই আমার
पण्डित बलेन,—“प्रभु किछु नहे भार
तोमार प्रसादे सर्व घरेइ आमार
 
 
अनुवाद
श्रीवास पंडित ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, यह मेरे लिए कोई बोझ नहीं है। आपकी कृपा से मेरे घर में सब कुछ उपलब्ध है।"
 
Srivasa Pandita replied, "O Lord, this is not a burden for me. By Your grace, everything is available in my house."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)