श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  2.5.124 
অতএব তাঙ্হার যে স্বভাব কহিতে
সন্তোষ পাযেন প্রভু সকল হৈতে
अतएव ताङ्हार ये स्वभाव कहिते
सन्तोष पायेन प्रभु सकल हैते
 
 
अनुवाद
इसलिए भगवान् अपने गुणों का महिमामंडन करने में सबसे अधिक संतुष्ट हैं।
 
Therefore the Lord is most satisfied in glorifying His qualities.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd