श्री रूपिणी क्वणयती चरणारविन्दं
लीलाम्बुजेन हरि सद्मनि मुक्ता दोषा
संलक्ष्यते स्फटिक कुड्य उपेता हेम्नि
सम्मार्जतीव यदनुग्रहणे अन्य यत्नः
"वैकुण्ठ ग्रहों में महिलाएं खुद भाग्य की देवी की तरह सुंदर हैं। ऐसी अलौकिक सुंदर महिलाएं, जिनके हाथों में कमल है और पैरों में पायल है, कभी-कभी संगमरमर की दीवारों को साफ करती हुई देखी जाती हैं, जो कि बीच-बीच में सोने की सीमाओं से सजी हुई हैं, ताकि ईश्वर के परम व्यक्तित्व का अनुग्रह प्राप्त हो सके।”
श्रीमद भागवत में अन्य जगह (1.16.32) यह कहा गया है :
ब्रह्मादयो बहु तिथम् यदपां गमोक्ष-
कामास तपः समचरण भगवत प्रपन्नाः
सास्रीः स्व वासम अरविन्द वनम् विहाया
यत पद सौभगम् अलम् भजते अनुराक्ता
“लक्ष्मी जी, भाग्य की देवी, जिनकी कृपा की एक झलक के लिए ब्रह्मा जैसे देवताओं ने ईश्वर के व्यक्तित्व को प्राप्त करने के लिए कई दिनों तक आत्मसमर्पण किया, उन्होंने कमल के फूलों के जंगल में अपना निवास त्याग दिया और प्रभु के चरण कमलों की सेवा में संलग्न हो गईं।”
