यह निश्चित जान लो कि अनंत नाम से प्रसिद्ध भगवान नित्यानंद प्रभु से भिन्न नहीं हैं।
Know this for sure that Lord Nityananda, famous by the name Anant, is not different from Prabhu.
तात्पर्य
ऐसा समझना चाहिए कि जो प्रभु की अनन्त रूप में सेवा करता है, वह नित्यानन्द हैं, और ऐसा समझना चाहिए कि जो प्रभु अपने सेवक नित्यानन्द की शाश्वत सेवा स्वीकार करते हैं, वे चैतन्य महाप्रभु हैं। चैतन्य-चरितामृत (आदि 7.14) देखें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥