অন্ন-পানি-নিদ্রা ছাডি’ শ্রী-রাম-চরণ
সেবিযাও আকাঙ্ক্ষা না পূরে অনুক্ষণ
अन्न-पानि-निद्रा छाडि’ श्री-राम-चरण
सेवियाओ आकाङ्क्षा ना पूरे अनुक्षण
अनुवाद
यद्यपि उन्होंने श्री राम के चरणकमलों की सेवा करने के लिए खाना-पीना और सोना सब त्याग दिया था, फिर भी उनकी तृप्ति नहीं हुई।
Although he had given up eating, drinking and sleeping to serve the lotus feet of Shri Ram, yet he was not satisfied.
तात्पर्य
श्री लक्ष्मण ने पीना, खाना और सोना त्याग दिया और निरंतर श्री रामचंद्र की सेवा में ही लगे रहे, फिर भी वे अपनी सेवा को अपर्याप्त मानते थे। लक्ष्मण की श्री राम की सेवा करने की इच्छा कभी तृप्त नहीं हुई, उनकी सेवाभावना इतनी विशाल थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥