श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.5.114 
যুগে যুগে প্রতি অবতারে অবতারে
স্বভাব তাঙ্হার দাস্য, বুঝহ বিচারে
युगे युगे प्रति अवतारे अवतारे
स्वभाव ताङ्हार दास्य, बुझह विचारे
 
 
अनुवाद
ध्यानपूर्वक विचार करें कि प्रत्येक युग में तथा प्रत्येक अवतार में भगवान का सेवक बने रहना उनकी स्वाभाविक विशेषता है।
 
Consider carefully that it is His natural characteristic to remain a servant of the Lord in every age and in every incarnation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)