श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.5.11 
হাসি’ বলে নিত্যানন্দ,—“শুন বিশ্বম্ভর
ব্যাস-পূজা এই মোর বামনার ঘর”
हासि’ बले नित्यानन्द,—“शुन विश्वम्भर
व्यास-पूजा एइ मोर वामनार घर”
 
 
अनुवाद
नित्यानंद मुस्कुराये और बोले, “हे विश्वम्भर, कृपया सुनिए, मैं इस ब्राह्मण के घर में व्यास-पूजा करूंगा।”
 
Nityananda smiled and said, “O Visvambhara, please listen, I will perform Vyasa-puja in this Brahmin's house.”
तात्पर्य
वामनारा घर वाक्यांश का तात्पर्य श्रीवास के घर या निवास से है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)