श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.4.9 
শুনি’ মাত্র নিত্যানন্দ শ্লোক-উচ্চারণ
পডিলা মূর্ছিত হঞানাহিক চেতন
शुनि’ मात्र नित्यानन्द श्लोक-उच्चारण
पडिला मूर्छित हञानाहिक चेतन
 
 
अनुवाद
जैसे ही नित्यानंद ने यह श्लोक सुना, वे अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े।
 
As soon as Nityananda heard this verse, he fell unconscious on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)