श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.4.75 
জগতে দুর্লভ বড বিশ্বম্ভর-নাম
সেই প্রভু চৈতন্য—সবার ধন-প্রাণ
जगते दुर्लभ बड विश्वम्भर-नाम
सेइ प्रभु चैतन्य—सबार धन-प्राण
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर का नाम इस संसार में अत्यंत दुर्लभ है। वे भगवान श्री चैतन्य हैं, जो सबके प्राण और आत्मा हैं।
 
The name of Visvambhara is very rare in this world. He is Lord Sri Chaitanya, the life and soul of all.
तात्पर्य

श्री चैतन्यदेव संपूर्ण जगत के लिए सर्वस्व और चौदह लोकों के प्राण हैं। विश्वंभर नाम इस जगत में अत्यंत दुर्लभ है। यह विश्वंभर ही श्री चैतन्य हैं। जिनकी कीर्ति श्री विश्वंभर के प्रियतम सेवक नित्यानंद के चरण कमलों में शरण लेने की है, ऐसे लोग भी दुर्लभ हैं। ऐसा सौभाग्य हर किसी को नहीं मिल पाता। इसीलिए विश्वंभर नाम दुर्लभ है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)