श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.4.71 
তাঙ্হার প্রসাদে হৈল চৈতন্যেতে মতি
তাঙ্হার আজ্ঞায লিখি চৈতন্যের স্তুতি
ताङ्हार प्रसादे हैल चैतन्येते मति
ताङ्हार आज्ञाय लिखि चैतन्येर स्तुति
 
 
अनुवाद
उनकी कृपा से मेरा मन भगवान चैतन्य की ओर आकर्षित हो गया और उनकी आज्ञा से मैं भगवान चैतन्य की यह स्तुति लिख रहा हूँ।
 
By His grace my mind was drawn towards Lord Chaitanya and by His permission I am writing this praise of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)