श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.4.70 
চৈতন্যের প্রিয দেহ—নিত্যানন্দ রাম
হৌ মোর প্রাণ-নাথ—এই মনস্কাম
चैतन्येर प्रिय देह—नित्यानन्द राम
हौ मोर प्राण-नाथ—एइ मनस्काम
 
 
अनुवाद
मेरी एकमात्र इच्छा यही है कि भगवान चैतन्य को सर्वाधिक प्रिय नित्यानंद राम मेरे जीवन के स्वामी बनें।
 
My only wish is that Nityananda Rama, who is most dear to Lord Chaitanya, should become the master of my life.
तात्पर्य
प्रिया देहा का एक अन्य पाठ प्रिया सह है, जिसका अर्थ है "प्रिय भी"। प्रिया देहा वाक्यांश यह दर्शाता है कि उनका शरीर प्रभु से भिन्न नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)