श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.4.65 
নিত্যানন্দ গৌরচন্দ্র দোঙ্হে দরশন
ইহার শ্রবণে হয বন্ধ-বিমোচন
नित्यानन्द गौरचन्द्र दोङ्हे दरशन
इहार श्रवणे हय बन्ध-विमोचन
 
 
अनुवाद
जो कोई भी नित्यानंद और गौरचन्द्र के मिलन के बारे में सुनता है, वह भौतिक बंधन से मुक्त हो जाता है।
 
Whoever hears about the union of Nityananda and Gaurachandra becomes free from material bondage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)