श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.4.63 
কেহ বলে,—“দুই-জনে বড পরিচয
কিছুই না বুঝি, সব ঠারেঠোরে কয”
केह बले,—“दुइ-जने बड परिचय
किछुइ ना बुझि, सब ठारेठोरे कय”
 
 
अनुवाद
किसी और ने कहा, "लगता है वे एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं। मैं उनके हाव-भाव से जो कुछ भी बोल रहे हैं, उसे समझ नहीं पा रहा हूँ।"
 
Someone else said, "They seem to know each other well. I can't understand what they're saying from their body language."
तात्पर्य
लेकिन अन्य लोगों ने कहा, "वे इतने अनुकूल हैं कि उनके एक दूसरे के प्रति प्यार को आम लोग नहीं समझ सकते। हम केवल कुछ इशारे ही देखते हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)