श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.4.58 
শ্রীবাস বলেন,—“উহা আমরা কি বুঝি?
মাধব-শঙ্কর যেন দোঙ্হে দোঙ্হা পূজি”
श्रीवास बलेन,—“उहा आमरा कि बुझि?
माधव-शङ्कर येन दोङ्हे दोङ्हा पूजि”
 
 
अनुवाद
श्रीवास बोले, "हम इसे क्या समझें? यह तो ऐसा है जैसे माधव और शंकर एक-दूसरे की पूजा कर रहे हों।"
 
Srivasa said, "What should we understand from this? It is as if Madhava and Shankara are worshipping each other."
तात्पर्य
श्रीवास कहते हैं, "हम उनके (महाप्रभु और नित्यानंद) संवाद को समझ नहीं पा रहे हैं। यह वर्तमान स्थिति उस स्थिति के समान है जब हरी और हर ने पहले लोगों को एक-दूसरे की पूजा करके चकित किया था।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)