मुरारी हंसकर कहने लगे, ‘‘गौर तथा नित्यानंद का जो संलाप हुआ है, उसको वे ही जानते हैं। उस विषय मैं हम-सबों की प्रविष्टि नहीं है।’’ यहाँ आमर-सबारे का अर्थ है-हम-सब।