| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन » श्लोक 57 |
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| | | | श्लोक 2.4.57  | হাসিযা মুরারি বলে,—“তোমরা
তোমরাউহা ত’না বুঝি কিছু আমরা-সবারা” | हासिया मुरारि बले,—“तोमरा
तोमराउहा त’ना बुझि किछु आमरा-सबारा” | | | | | | अनुवाद | | मुरारी मुस्कुराये और बोले, “आप एक दूसरे को समझते हैं, लेकिन हम आपकी कोई भी बात नहीं समझते।” | | | | Murari smiled and said, “You understand each other, but we do not understand anything you say.” | | ✨ ai-generated | | |
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