श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  2.4.55-56 
প্রভু বলে,—“আমরা-সকল ভাগ্যবান্
তুমি-হেন ভক্তের হৈল উপস্থান
আজি কৃতকৃত্য হেন মানিল আমরাদেখিল
যে তোমার আনন্দ-বারিধারা”
प्रभु बले,—“आमरा-सकल भाग्यवान्
तुमि-हेन भक्तेर हैल उपस्थान
आजि कृतकृत्य हेन मानिल आमरादेखिल
ये तोमार आनन्द-वारिधारा”
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "हम सब भाग्यशाली हैं कि हमारे बीच आप जैसे महान भक्त हैं। हम मानते हैं कि आज हमारा जीवन सफल हो गया क्योंकि हमने आपके प्रेम के बहते आँसुओं के दर्शन किए।"
 
The Lord said, “We are all fortunate to have a great devotee like you among us. We consider our lives successful today because we have seen your flowing tears of love.”
तात्पर्य
भगवान ने उत्तर दिया, "आज हम धन्य हैं। तेरे जैसे प्रभु के सेवक के आगमन और तेरे प्रेम के आँसू देखकर हमारा जीवन सफल हो गया है।" उपस्थान शब्द (उप—"निकट" + स्था—"रहना" + अन—भाव—अण) का अर्थ है "उपस्थिति" या "निकट आना।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)