श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.4.5 
বুঝিলেন সর্ব-প্রাণনাথ গৌর-রায
নিত্যানন্দ জানাইতে সৃজিলা উপায
बुझिलेन सर्व-प्राणनाथ गौर-राय
नित्यानन्द जानाइते सृजिला उपाय
 
 
अनुवाद
तब भगवान गौरांग ने, जो सभी के जीवन और आत्मा हैं, नित्यानंद की पहचान प्रकट करने का कुछ उपाय सोचा।
 
Then Lord Gauranga, who is the life and soul of all, thought of some way to reveal the identity of Nityananda.
तात्पर्य
गौरासुंदर, सबके हृदय के स्वामी, नित्यानंद की सेवा प्रवृत्ति को समझते थे। नित्यानंद को अपने रूप को प्रकट करने के उपाय के बारे में सोचते हुए, उन्होंने श्रीवास पंडित को कृष्ण के सुंदर रूप की महिमा करते हुए एक श्लोक सुनाने के लिए कहा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)