श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.4.48 
প্রভু করে স্তুতি, শুনি’ লজ্জিত
হৈযাব্যপদেশে সর্ব কথা কহেন ভাঙ্গিযা
प्रभु करे स्तुति, शुनि’ लज्जित
हैयाव्यपदेशे सर्व कथा कहेन भाङ्गिया
 
 
अनुवाद
प्रभु द्वारा अपनी महिमा का बखान सुनकर वह शर्मिंदा हुआ, इसलिए उसने चतुराई से प्रभु के कथन को स्पष्ट किया।
 
He felt embarrassed when he heard the Lord glorify Him, so he cleverly clarified the Lord's statement.
तात्पर्य
व्यापदेशे शब्द का अर्थ है "हाव-भाव से" या "संकेतों के माध्यम से।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)