श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.4.47 
’এই প্রভু অবতীর্ণ’ জানিলেন মর্ম
কর-যোড করি’ বলে হৈ’ বড নম্র
’एइ प्रभु अवतीर्ण’ जानिलेन मर्म
कर-योड करि’ बले है’ बड नम्र
 
 
अनुवाद
वह समझ गया, "यह मेरे प्रभु हैं जो अवतरित हुए हैं।" उसने हाथ जोड़े और विनम्रतापूर्वक कहा।
 
He understood, "It is my Lord who has descended." He folded his hands and said humbly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)