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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
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श्लोक 46
श्लोक
2.4.46
শিশু-মতি নিত্যানন্দ—পরম-বিহ্বল
বালকের প্রায যেন বচন চঞ্চল
शिशु-मति नित्यानन्द—परम-विह्वल
बालकेर प्राय येन वचन चञ्चल
अनुवाद
अभिभूत नित्यानंद ने एक बालक जैसी मानसिकता प्रदर्शित की। वे एक छोटे बालक की तरह बेचैनी से बोले।
Overwhelmed, Nityananda displayed a childlike mentality. He spoke restlessly like a small child.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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