श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.4.45 
প্রভু বলে,—“জিজ্ঞাসা করিতে করি ভয
কোন্ দিক হৈতে শুভ করিলে বিজয?”
प्रभु बले,—“जिज्ञासा करिते करि भय
कोन् दिक हैते शुभ करिले विजय?”
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "मैं पूछने में डर रहा हूँ, लेकिन आप किस दिशा से आये हैं?"
 
The Lord said, “I am afraid to ask, but from which direction did you come?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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