श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.4.44 
নিত্যানন্দ-চৈতন্যের অনেক আলাপ
সব কথাঠারেঠোরে, নাহিক প্রকাশ
नित्यानन्द-चैतन्येर अनेक आलाप
सब कथाठारेठोरे, नाहिक प्रकाश
 
 
अनुवाद
नित्यानंद और चैतन्य एक दूसरे से संकेतों और हाव-भावों के माध्यम से बातचीत करते थे जो दूसरों के लिए अज्ञात थे।
 
Nityananda and Chaitanya communicated with each other through signs and gestures that were unknown to others.
तात्पर्य
थाथैथोरै वाक्यांश का मतलब है "संकेतों के माध्यम से", "इशारों के माध्यम से", या "सीधी बातचीत के बिना"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)