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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
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श्लोक 35
श्लोक
2.4.35
এ-কম্প, এ অশ্রু, এ গর্জন হুহুঙ্কার
এহ কি ঈশ্বর-শক্তি বৈ হয আর
ए-कम्प, ए अश्रु, ए गर्जन हुहुङ्कार
एह कि ईश्वर-शक्ति बै हय आर
अनुवाद
“क्या ऐसा कांपना, ऐसे आंसू और ऐसी ऊंची गर्जना किसी और के लिए संभव है, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे प्रभु ने शक्ति दी हो?
“Is such trembling, such tears, and such loud roar possible for anyone except one who has been given power by the Lord?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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