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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
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श्लोक 33
श्लोक
2.4.33
দোঙ্হে দোঙ্হা দেখি’ বড হরিষ
হৈলাদোঙ্হার নযন-জলে পৃথিবী ভাসিলা
दोङ्हे दोङ्हा देखि’ बड हरिष
हैलादोङ्हार नयन-जले पृथिवी भासिला
अनुवाद
एक-दूसरे को देखकर वे दोनों प्रसन्नता से भर गए। पृथ्वी उनके आँसुओं से भर गई।
Seeing each other, they were filled with joy. The earth was filled with their tears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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