श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.4.30 
নিত্যানন্দ-প্রভাবের জ্ঞাতাগদাধর
নিত্যানন্দ—জ্ঞাতা গদাধরের অন্তর
नित्यानन्द-प्रभावेर ज्ञातागदाधर
नित्यानन्द—ज्ञाता गदाधरेर अन्तर
 
 
अनुवाद
गदाधर नित्यानंद की महिमा को जानते हैं और नित्यानंद गदाधर के मन को जानते हैं।
 
Gadadhara knows the glory of Nityananda and Nityananda knows the mind of Gadadhara.
तात्पर्य
गदाधर गौरसुंदर की अत्यंत गोपनीय शक्ति हैं, इसलिए वह गौर के सेवक नित्यानंद की अद्भुत महिमा को जानते हैं। नित्यानंद भी कमोबेश गदाधर के मन को जानते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)