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श्लोक 2.4.23-24  |
ভাসে নিত্যানন্দ চৈতন্যের প্রেম-জলে
শক্তি-হত লক্ষ্মণ যে-হেন রাম-কোলে
প্রেম-ভক্তি-বাণে মূর্ছা গেলা নিত্যানন্দ
নিত্যানন্দ কোলে করি’ কাঙ্দে গৌরচন্দ্র |
भासे नित्यानन्द चैतन्येर प्रेम-जले
शक्ति-हत लक्ष्मण ये-हेन राम-कोले
प्रेम-भक्ति-बाणे मूर्छा गेला नित्यानन्द
नित्यानन्द कोले करि’ काङ्दे गौरचन्द्र |
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| अनुवाद |
| नित्यानंद चैतन्य के प्रेम के जल में तैर रहे थे। जिस प्रकार शक्ति-शील बाण लगने के बाद लक्ष्मण रामचंद्र की गोद में ही रहे, उसी प्रकार प्रेमोन्माद के बाण लगने से नित्यानंद मूर्च्छित हो गए। नित्यानंद को गोद में लेकर गौरचंद्र रोने लगे। |
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| Nityananda was swimming in the waters of Chaitanya's love. Just as Lakshmana remained in Ramachandra's lap after being struck by the arrow of power and ecstasy, so too did Nityananda faint after being struck by the arrow of love. Gaurachandra, holding Nityananda in his lap, began to cry. |
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