श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.4.22 
যার প্রাণ, তানে নিত্যানন্দ সমর্পিযা
আছেন প্রভুর কোলে অচেষ্ট হৈযা
यार प्राण, ताने नित्यानन्द समर्पिया
आछेन प्रभुर कोले अचेष्ट हैया
 
 
अनुवाद
नित्यानन्द ने अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दिया और भगवान की गोद में निश्चल हो गये।
 
Nityananda dedicated his life to God and became motionless in God's lap.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)