श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.4.21 
বিশ্বম্ভর-কোলে মাত্র গেলা নিত্যানন্দ
সমর্পিযা প্রাণ তানে হৈলা নিষ্পন্দ
विश्वम्भर-कोले मात्र गेला नित्यानन्द
समर्पिया प्राण ताने हैला निष्पन्द
 
 
अनुवाद
जैसे ही नित्यानंद को विश्वम्भर ने अपनी गोद में ले लिया, उन्होंने अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दिया और निश्चल हो गये।
 
As soon as Nityananda was taken into the lap of Visvambhara, he surrendered his life to the Lord and became still.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)