vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
»
श्लोक 19
श्लोक
2.4.19
পুনঃ পুনঃ বাদে সুখ অতি অনিবার
ধরেন সবাই—কেহ নারে ধরিবার
पुनः पुनः बादे सुख अति अनिवार
धरेन सबाइ—केह नारे धरिबार
अनुवाद
उनकी खुशी लगातार बढ़ती जा रही थी। हालाँकि उन्होंने उन्हें थामे रखने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे।
His joy continued to grow. Although he tried to contain it, he failed.
तात्पर्य
अनिवार शब्द उन चीज़ों को संदर्भित करता है जिन्हें रोका नहीं जा सकता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×