श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.4.18 
দেখিযা অদ্ভুত কৃষ্ণ-উন্মাদ-আনন্দ
সকল বৈষ্ণব-সঙ্গে কান্দে গৌরচন্দ্র
देखिया अद्भुत कृष्ण-उन्माद-आनन्द
सकल वैष्णव-सङ्गे कान्दे गौरचन्द्र
 
 
अनुवाद
कृष्ण के प्रेम में उनकी अद्भुत उन्मादपूर्ण उन्मत्तता को देखकर गौरचन्द्र तथा सभी वैष्णव रोने लगे।
 
Seeing his wonderful ecstatic frenzy in love for Krishna, Gaurachandra and all the Vaishnavas began to cry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)