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श्लोक 2.4.16  |
বিশ্বম্ভর-মুখ চাহি’ ছাডে ঘন-শ্বাস
অন্তরে আনন্দ, ক্ষণে ক্ষণে মহা-হাস |
विश्वम्भर-मुख चाहि’ छाडे घन-श्वास
अन्तरे आनन्द, क्षणे क्षणे महा-हास |
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| अनुवाद |
| विश्वम्भर के मुख की ओर देखते हुए उन्होंने गहरी साँस ली। उनका हृदय आनंद से भर गया और वे बार-बार ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। |
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| Looking at Vishvambhara's face, he took a deep breath. His heart filled with joy, and he burst into loud laughter again and again. |
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