vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
»
श्लोक 14
श्लोक
2.4.14
অন্যের কি দায, বৈষ্ণবের লাগে ভয
“রক্ষ কৃষ্ণ, রক্ষ কৃষ্ণ” সবে সঙরয
अन्येर कि दाय, वैष्णवेर लागे भय
“रक्ष कृष्ण, रक्ष कृष्ण” सबे सङरय
अनुवाद
अन्यों की तो बात ही क्या, वैष्णव भी भयभीत हो गए। उन्होंने प्रार्थना की, "हे कृष्ण, कृपया उनकी रक्षा करें।"
Not to speak of others, even the Vaishnavas became frightened. They prayed, "O Krishna, please protect him."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×