श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.4.14 
অন্যের কি দায, বৈষ্ণবের লাগে ভয
“রক্ষ কৃষ্ণ, রক্ষ কৃষ্ণ” সবে সঙরয
अन्येर कि दाय, वैष्णवेर लागे भय
“रक्ष कृष्ण, रक्ष कृष्ण” सबे सङरय
 
 
अनुवाद
अन्यों की तो बात ही क्या, वैष्णव भी भयभीत हो गए। उन्होंने प्रार्थना की, "हे कृष्ण, कृपया उनकी रक्षा करें।"
 
Not to speak of others, even the Vaishnavas became frightened. They prayed, "O Krishna, please protect him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)