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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
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श्लोक 12
श्लोक
2.4.12
পুনঃ পুনঃশ্লোক শুনি’ বাডযে উন্মাদ
ব্রহ্মাণ্ড ভেদযে হেন শুনি’ সিṁহ-নাদ
पुनः पुनःश्लोक शुनि’ बाडये उन्माद
ब्रह्माण्ड भेदये हेन शुनि’ सिꣳह-नाद
अनुवाद
जैसे-जैसे वह लगातार श्लोकों का पाठ सुनता गया, उसका पागलपन बढ़ता गया। वह इतनी ज़ोर से दहाड़ा कि उसकी ध्वनि ब्रह्मांड में गूँज उठी।
As he listened to the continuous recitation of the verses, his madness grew. He roared so loudly that the sound echoed throughout the universe.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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