श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.3.97 
সে বিলাপ ক্রন্দন করিব কোন্ জনে?
বিদরে পাষাণ কাষ্ঠ তাহার শ্রবণে
से विलाप क्रन्दन करिब कोन् जने?
विदरे पाषाण काष्ठ ताहार श्रवणे
 
 
अनुवाद
उस ब्राह्मण के करुण क्रंदन का वर्णन कौन कर सकता है? उसकी ध्वनि से पत्थर और लकड़ी भी पिघल गए।
 
Who can describe the pitiful cries of that Brahmin? Even stones and wood melted at the sound of their cries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)