श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.3.87 
ভিক্ষুকেরে পূর্বে মহাপুরুষ-সকল
প্রাণ-দান দিযাছেন করিযা মঙ্গল
भिक्षुकेरे पूर्वे महापुरुष-सकल
प्राण-दान दियाछेन करिया मङ्गल
 
 
अनुवाद
“अतीत में अनेक महान व्यक्तियों ने अपना जीवन संन्यासी के रूप में समर्पित कर दिया और इस प्रकार कल्याण प्राप्त किया।
 
“Many great people in the past dedicated their lives as sannyasis and thus attained well-being.
तात्पर्य
ऐसा तो बहुत से पूर्व इतिहासों में पाया जाता है कि महापुरुषों ने अपने उद्देश्य की सिद्धि के लिए संन्यासियों को अपना जीवन दान दिया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)