श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.3.85 
শুনিযা ন্যাসীর বাক্য শুদ্ধ-বিপ্র-বর
মনে মনে চিন্তে বড হৈযা কাতর
शुनिया न्यासीर वाक्य शुद्ध-विप्र-वर
मने मने चिन्ते बड हैया कातर
 
 
अनुवाद
संन्यासी के वचन सुनकर शुद्ध ब्राह्मण दुःख से पीड़ित हो गया और इस प्रकार विचार करने लगा।
 
Hearing the words of the Sanyasi, the pure Brahmin became distressed and started thinking like this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)