प्रातःकाल जब संन्यासी जाने वाले थे, तो उन्होंने नित्यानंद के पिता से इस प्रकार कहा।
In the morning, when the Sanyasi was about to leave, he said this to Nityananda's father.
तात्पर्य
संन्यासी अधिक समय गृहस्थों के घर में न रहने से उन के मोह में नहीं फँसते। इसी से द्वितीय प्रातःकाल संन्यासी हाडा पंडित के यहाँ से चलने को तैयार हुए और जाने लगे। तभी उनका मुँह से वाणी निकली।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥