श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.3.7 
ছাডি’ ধন, পুত্র, গৃহ, সর্ব-ভক্ত-গণ
অহর্-নিশ প্রভু-সঙ্গে করেন কীর্তন
छाडि’ धन, पुत्र, गृह, सर्व-भक्त-गण
अहर्-निश प्रभु-सङ्गे करेन कीर्तन
 
 
अनुवाद
सभी भक्तगण अपनी सम्पत्ति, संतान और घर-गृहस्थी छोड़कर दिन-रात भगवान की कीर्तन में लगे रहते थे।
 
All the devotees left their property, children and household and remained engaged in the chanting of God's name day and night.
तात्पर्य
सभी प्रभु के सेवक अपने घरों, संतानों और धन-दौलत के प्रति आसक्ति त्यागकर प्रभु के साथ निरंतर कीर्तन में संलग्न रहे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)