श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.3.67 
তান বাল্য-লীলা আদি-খণ্ডেতে বিস্তর
এথায কহিলে হয গ্রন্থ বহুতর
तान बाल्य-लीला आदि-खण्डेते विस्तर
एथाय कहिले हय ग्रन्थ बहुतर
 
 
अनुवाद
उनकी बाल लीलाओं का वर्णन आदिखण्ड में पहले ही किया जा चुका है। यदि मैं उन्हें यहाँ पुनः वर्णित करूँ, तो यह ग्रन्थ बहुत बड़ा हो जाएगा।
 
His childhood pastimes have already been described in the Adikhand. If I were to recount them here, this book would become very long.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)