श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.3.58 
মিলিলা সকল ভক্ত, বৈ নিত্যানন্দ
ভাই না দেখিযা বড দুঃখী গৌরচন্দ্র
मिलिला सकल भक्त, बै नित्यानन्द
भाइ ना देखिया बड दुःखी गौरचन्द्र
 
 
अनुवाद
नित्यानंद को छोड़कर सभी भक्त एकत्रित हो गए। गौरचन्द्र अपने भाई को न देखकर दुःखी हो गए।
 
All the devotees gathered except Nityananda. Gaurachandra was saddened by the loss of his brother.
तात्पर्य
जब गौरसुन्दर ने देखा कि नित्यानंद को छोड़कर सभी भक्तों ने आनंदपूर्ण कीर्तन पास्टाइम में भाग लिया, तब वे नित्यानंद से वियोग में विशेष रूप से दुःखी हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)