जब गौरसुन्दर ने देखा कि नित्यानंद को छोड़कर सभी भक्तों ने आनंदपूर्ण कीर्तन पास्टाइम में भाग लिया, तब वे नित्यानंद से वियोग में विशेष रूप से दुःखी हुए।