श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  2.3.57 
প্রভু-সঙ্গে মিলিযা সকল ভক্ত-গণ
মহানন্দে অহর্-নিশ করযে কীর্তন
प्रभु-सङ्गे मिलिया सकल भक्त-गण
महानन्दे अहर्-निश करये कीर्तन
 
 
अनुवाद
भगवान की संगति में सभी भक्तजन दिन-रात आनन्दपूर्वक पवित्र नामों का जप करते रहते थे।
 
All the devotees, in the company of the Lord, joyfully chanted the holy names day and night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)