तब उन्हें नास्तिकों से भय नहीं रहा और वे सभी सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम तथा ऊंचे स्वर में कृष्ण का नाम जपने लगे।
Then he was no longer afraid of the atheists and started chanting the name of Krishna openly and loudly in all public places.
तात्पर्य
जब गौराहरी ने भक्तों पर अपनी वास्तविक पहचान प्रकट की तब उन सभी ने अपनी भौतिक असुविधाओं को त्याग दिया और आध्यात्मिक आनंद में लीन हो गए। इसलिए, ये भक्त निरंतर और ऊँची आवाज में कृष्ण के नामों का जाप हर जगह बिना नास्तिकों द्वारा धमकी दिए जाने वाले राजा के दंड के भय के करते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥