श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.3.55 
চিনিযা সকল ভৃত্য—প্রভু আপনার
পরানন্দ-ময চিত্ত হৈল সবার
चिनिया सकल भृत्य—प्रभु आपनार
परानन्द-मय चित्त हैल सबार
 
 
अनुवाद
जब सेवकों ने अपने प्रभु को पहचान लिया तो उनके हृदय आनंद से भर गये।
 
When the servants recognized their Lord, their hearts were filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)