श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.3.54 
এই-মত সর্ব-সেবকের ঘরে ঘরে
কৃপায ঠাকুর জানাযেন আপনারে
एइ-मत सर्व-सेवकेर घरे घरे
कृपाय ठाकुर जानायेन आपनारे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रभु ने अपने सभी सेवकों के घरों में स्वयं को प्रकट किया।
 
Thus the Lord revealed Himself in the homes of all His servants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)