श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.3.53 
মুরারি-সহিত গৌরচন্দ্র জয জয
জয যজ্ঞ-বরাহ—সেবক-রক্ষা-ময
मुरारि-सहित गौरचन्द्र जय जय
जय यज्ञ-वराह—सेवक-रक्षा-मय
 
 
अनुवाद
मुरारी की संगति में गौरचन्द्र की जय हो! यज्ञ के स्वामी और भक्तों के रक्षक वराह की जय हो!
 
Hail to Gaurachandra in the company of Murari! Hail to Varaha, the lord of sacrifices and protector of devotees!
तात्पर्य
सभी महिमा वैराह की है, जो सभी यज्ञों का आनंद लेते हैं, जो भक्तों की रक्षा करते हैं, और गौराचंद्र और मुरारी के साथ सभी महिमा!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)