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श्लोक 2.3.53  |
মুরারি-সহিত গৌরচন্দ্র জয জয
জয যজ্ঞ-বরাহ—সেবক-রক্ষা-ময |
मुरारि-सहित गौरचन्द्र जय जय
जय यज्ञ-वराह—सेवक-रक्षा-मय |
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| अनुवाद |
| मुरारी की संगति में गौरचन्द्र की जय हो! यज्ञ के स्वामी और भक्तों के रक्षक वराह की जय हो! |
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| Hail to Gaurachandra in the company of Murari! Hail to Varaha, the lord of sacrifices and protector of devotees! |
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